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आईसीयू में बेटी-बेटी के चरित्र पर उंगली उठाना शर्मनाक ..आरती

*रायगढ़*

*✍मिट जायेगी छपास की भूख !! सच कभी छुपता नही मरता नही।छपास की भूखी फर्जी समाजसेवी की नकली स्टोरी पर अनुभव।*

*✍बेटी तेरे साथ खड़े हैं हर नेकदिल इंसान। दुआएं है साथ – आरती*

मैने देखा है लोगो को अपने काम से ज्यादा छपास की भूख होती है।ऐसे लोगों को प्रेजेंट करने से पहले 100 बार सोंचे।किसी भी मुद्दे पर सहयोग करने वालों के लिए यह ये इस भूख की बात नही कही गई है कुछ लोग केवल हाइलाइट होने के लिए खुद के पैरों में कुल्हाड़ी मारते है उनके लिए यह शब्द है छपास की भूख।

शासन सत्ता की दलाली,मंत्री मिनिस्टर की चाटूकारिता और झूठ की दलील देने वाले कभी भी कोई भी काम निष्पक्ष नही कर सकते है चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक गिरना पड़ जाए वो गिर जाते है।नही सोचते है कि उनकी गलत और पूर्व प्रायोजित करतूतों से कोई परिवार न्याय से वंचित हो सकता है।कुछ लोग छपास की भूख से ऐसे तपडते है जैसे उनसे पहले और उनकी बराबरी कोई भी सच और झूठ को न समझ सके,और हड़बड़ी में मिनटों में उन्हें हम हीरो बना रहे ऐसी भूख उन्हें होती है।ऐसे भूखे लोग क्या किसी का भला करेंगे जो एक परिवार की भावनाओ को समझे बिना ही उनकी पेशी लेकर उन्हें सजा सुना दे और मरणासन्न स्थिति में पड़ी बेटी को ही दोषी ठहराए?

रायपुर से खरसिया और खरसिया से रायगढ़ पहुँचकर एक फर्जी और आर्टिफिशियल समाजसेवी ने महिला सम्मान का मजाक उड़ाया है जिसे मीडिया में अधूरी जानकारी के साथ सुखियाँ बटोरने का बड़ा शौक चढ़ा है जो कुछ लोगो द्वारा बकायदा मैनेज होकर आई और फिर अचानक ही स्टोरी को ही बदल दी।ऐसे दलालो को जूतों की माला पहनानी चाहिए।क्या हमारे समाज मे आज भी महिला का बयान महिला की रायशुमारी, उसके स्टेटमेंट की कोई जरूरत नही ?-कुछ लोग खड़े होकर उनकी कहानी बनाएंगे और कुछ लोग उस पर हामी भर देंगे तो क्या इस आधार पर हम किसी भी बेटी के चरित्र पर शंका कर उसे दोषी साबित कर देंगे और छुपे हुए दोषियों को जिन्हें शातिराना तरीके षड्यंत्र पूर्वक बचाने का आरोप है उन्हें बचाने के लिए दलाली करते हुए दोषियों पर कार्यवाही करने के बजाय उल्टे उन्हें सरंक्षण दे दिया जाए तो इसे क्या कहेंगे।

बहुत तकलीफ होता है जब कोई भरोसा करके धोखा दे खासकर उस परिवार को धोखा दे जो पल पल न्याय के इंतजार में है जिनका पूरा परिवार दहशत के साये में जी रहा है उस परिवार के साथ गलत करना और दोषियों को बचाने का प्रयास करना बहुत ही निंदनीय है।

सेवा निःस्वार्थ होता है उसमें कोई स्वार्थ नही होता है,और जो छपास और स्वहित,सत्ता की दलाली वाली झूठी सेवा होती है उसे स्वार्थ कहते है सेवा नही।अपने मुंह मिया मिठ्ठू बनने वालों को यह बात सोचनी ही चाहिए कि ये पब्लिक है ये सब जानती है।सच क़भी छुपता नही, न ही मरता है सच सच होता है एक न एक दिन बाहर आयेगा तब उठ जायेगा ये झूठ का पर्दा और मिट जायेगी छपास की भूख।।

*क्रमशः…… ✍गीधा निर्भया कांड खरसिया।*

*निष्पक्ष ✍ निर्भिक*

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