🌺आज है माँ हलषष्ठी(खमरछठ) व्रत🌺।सभी माताओं को हलषष्ठी व्रत पूजा की बधाई।

*🙏 जय माँ हलषष्ठी जी🙏*

*🌺संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं रखती हैं हलषष्ठी का यह व्रत। इस पूजा से संतानों को मिलता है सुख समृद्वि, बेहतर स्वास्थ और दीर्घायु होने का मांगा जाता है वरदान🌺।*

माता संतान की दीर्घायु के लिए हलषष्ठी व्रत रखती हैं। छत्तीसगढ़ में इस पूजा को खमरछठ के नाम से भी जाना जाता है जो कि आज 21 अगस्त 2019 को है।

🌺कब और क्यों करते है यह पूजा🌺

यह व्रत महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि और संतान की दीर्घायु, वास, सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। भारत के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में इसे ललई छठ और छत्तीसगढ़ में खमरछठ के नाम से जाना जाता है।

भगवान श्री कृष्ण के भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष में ही हलषष्ठी व्रत मनाने की परंपरा है।यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है क्योंकि बलराम का प्रधान शस्त्र हल और मुसल है। इसलिए उन्हें हलदर भी कहा जाता है। उनके ही नाम पर इस पुनीत पावन पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा है।

🌺हलषष्ठी मे व्रत में क्या खाएं,क्या न खाएं🌺

इस दिन हल से जुता हुआ कुछ खाना वर्जित है। माताओं को महुआ की दातुन और महुआ खाने का विधान है। इस व्रत में हल से जुता हुआ फल व अन्य खाना वर्जित माना गया है। गाय के दूध-दही का प्रयोग भी वर्जित है। इस व्रत में भैंस की दूध,दही,घी का उपयोग किया जाता है।भैंस के गोबर से ही पूजा स्थान को लीपा जाता है।इस व्रत में पसहर (पाषाढ़ी) का चांवल,और छः प्रकार की भाजी और भैंस की ही घी दही का भोजन किया जाता है पूजा के बाद।

🌺विवाहित व पुत्रवती,पुत्रिवती स्त्रियां करती है यह व्रत।🌺

इस व्रत को विवाहित पहली संतान की प्राप्ति व नवविवाहित स्त्रियां करती हैं। तत्पश्चात हलषष्ठी माता की कथा सुनने का भी विधान है। हलषष्ठी व्रत से संतान सुरक्षित रहती है। माताएं संतान की दीर्घायु व सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत प्राथमिकता से करती है।

🌺पूजा विधि🌺

पूजन विधि में सर्वप्रथम प्रात काल स्नान आदि से निवृत्त होकर गोबर से धरती को लीपा जाता है। इसके बाद छोटे से तालाब की आकृति बनानी चाहिए। उस पर झावेरी क्लास का फूल, गूलर व उसकी एक-एक साफा बांधकर एक जगह गांव दें।तत्पश्चात इनकी पूजा करें। भुना हुआ गेहूं, चना, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ, आदी चढ़ाएं और इसी के साथ हल्दी के रंग में रंगा हुआ वस्त्र व सुहाग सामग्री चढ़ाएं।मिट्टी से बच्चों के खेलने की चीजें बनाई जाती है,जैसे नाव,तीर,धनुष,कंचा भौरा आदि।पूजन पश्चात सभी को प्रसाद बांटते है।छुही मिट्टी को भिगाकर उसमे नए कपड़े के छोटे टुकड़े को भिगाकर बच्चों को पोता मारा जाता है छः छः बार,यही माँ हलषष्ठी व माँ का आशीर्वाद होता है।

🌺कामना🌺

पूजा के बाद महिलाएं करती हैं ये कामना हे हलषष्ठी माता हमारी सन्तानो को सुख शांति सौभाग्य,देना अटल सुहाग का वरदान देना।बाल गोपाल को सदैव हर संकट से बचाना।अपनी कृपा सदैव हमारे परिवार पर बनाये रखना माँ हलषष्ठी जी।

bhupendra

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