कोरोना महामारी को दे रहे यहाँ खुला निमंत्रण* *जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन के अधिकारी,कर्मचारी बने  उदासीन*

कोरोना महामारी को दे रहे यहाँ खुला निमंत्रण*
*जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन के अधिकारी,कर्मचारी बने  उदासीन*
*असलम आलम खान धरमजयगढ़* विकास खंड धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत क्या गांव , क्या शहर हर जगह  रोजाना कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान हो रही है,जो की बड़ी चिंताजनक ख़बर है। कोविड 19 पॉजिटिव मरीजों की तादाद में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.जिससे वायरस फैलने को लेकर क्षेत्र के लोग सहमे हुए है.हालांकि सभ्य लोग अपने स्तर पे शासन के नियम सोसल व फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर कर रहे हैं। फेस कवर का इस्तेमाल भी किया जा रहा हैं। वहीँ सरकार द्वारा इस भयंकर महामारी से निपटने एवं सुरक्षित रहने तमाम नियम शर्ते लागू कर दी गई है. ताकि कोरोना जैसे महामारी से जल्द से जल्द निपटा जा सके।
लेकिन आपको बता दें, धरमजयगढ़ नगर के हृदय स्थल बस स्टैंड में कुछ उलट नजारे देखने मिल रहे हैं. जो स्थानीय प्रशासन की समान नियम व कानून व्यवस्था की, पोल खोल रही है।यहाँ की तस्वीरें भी साफ़ बयान कर रही हैं की कोरोना को लेकर स्थानीय प्रशासन कितना एलर्ट है ?
ताज़ा जानकारी के मुताबिक कोरोनाकाल मे धरमजयगढ़ से होकर गुजरने वाली यात्री बस जो करीब सुबह 5:00 से 6: 00 बजे के बीच बस स्टैंड धरमजयगढ़ में आती है व कुछ देर रुकती हैं ,जिनमे खासकर बाहरी पैसेंजर्स होते हैं ,जो बस से उतरकर फ्रेश होते है काफी देर यहाँ रुकते है, उसके बाद सीधे चाय दुकान में बड़े चाव से चाय पीते हुए नज़र आते हैं,जो कॉरोना काल में पूर्णतः गलत है.
जबकि बता दें कोरोनाकाल के मद्देनजर सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक बाजार दुकान खुलने का समय हैं। लेकिन यहाँ नजारा कुछ और ही है सुबह 6:00 बजे से बस स्टैंड में कुछ चाय दुकाने खुल जा रही है। जिन्हें लगता है स्थानीय प्रशासन का जरा भी भय नही है या फिर कहले *”एक आंख में काजल एक आँख में  शूरमा”वाली कहावत* यहाँ पूर्ण रूप से चरितार्थ हो रहा है।
चाय दुकान में बिना मास्क के लोगों की भीड़ देखी जा रही है। ऐसे में यह कहना बिल्कुल अनुचित होगा कि इस बात की जानकारी स्थानीय प्रशासन को नही है। वहीं नजदीक में थाना है करीब में तहसील ऑफिस है।बगल में नगरपंचायत कार्यालय है। फिर भी नियम कानून को ताक में रखकर बस चालक व चाय दुकानदार कोरोना वायरस को खुला नेवता दे रहें हैं। यहाँ यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी के कुछ स्वार्थी किस्म के लोग अपने मफाद के लिए कोरोना जैसे महामारी को मजाक बना लिए हैं।
जब की शासन प्रशासन ने साफ तौर पर कह  दी है, कि कोरोना काल में नियमो का विशेष पालन होना है ।
लेकिन यहाँ शासन की नियमों को  ठेंगा दिखाया जा रहा है.और प्रशासन हाथ पे हाथ धरे बैठी है. ऐसे आलम में इसे स्थानीय प्रशासन की लापरवाही कह ले  या नियम के हिसाब से इसे सौतेला व्यवहार?बहरहाल यही स्थिति बनी रही तो कहीं न कहीं आने वाले समय मे ये भयंकर विस्फोटक स्थिति की वजह बन सकती है। जिसके पूर्णतः जिम्म्मेदार कहीं न कहीं स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी हो सकते है।

bhupendra

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