शिक्षक पढ़ई तुँहर दुआर : कोरोना काल में भी छात्रों को घर बैठे मिल रही है विषयों की जानकारी मोहल्ला क्लास एवं वर्चुअल कक्षाओं के माघ्यम से छात्रो को पढ़ाने में जुटे जिले के शिक्षक

शिक्षक पढ़ई तुँहर दुआर : कोरोना काल में भी छात्रों को घर बैठे मिल रही है विषयों की जानकारी

मोहल्ला क्लास एवं वर्चुअल कक्षाओं के माघ्यम से छात्रो को पढ़ाने में जुटे जिले के शिक्षक

आज कोरोना के अभिशप्त ग्रहण से सम्पूर्ण सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक कार्यक्षेत्र से प्रभावित हैं और कोरोना के इस बहुआयामी दुष्प्रभाव से शैक्षणिक क्षेत्र भी अछुता नहीं रहा है। विदित हो कि कोरोना संक्रमण काल में सभी शैक्षणिक संस्थाएं, शालाएं बंद चल रही है या यूं कहा जा सकता है कि कोरोना संकट के चलते सभी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां ‘आईसीयू‘ में पहुंच गई हैं परन्तु ऐसी विकट परिस्थिति में बच्चों के शिक्षा को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता और इन्हीं नौनिहालों की भविष्य के मद्देनजर कोई न कोई रास्ता निकालना अब अपरिहार्य बन चुका है। सौभाग्य से नई संचार टेक्नोलाॅजी की बदौलत अब किसी न किसी माध्यम से बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने में अब हम समर्थ है। इस क्रम में जिले के विभिन्न संकुलों में शिक्षकों द्वारा कई प्रकार के शैक्षणिक नवाचार भी किये जा रहे है। ऐसे ही विकासखण्ड फरसगांव के ग्राम लंजोड़ा के कन्या उच्चतर मा0 वि0 में पदस्थ शिक्षक श्री अचिन्त्य मण्डल द्वारा भी बच्चों को एंड्रायड फोन के माध्यम से वर्चुअल कक्षाएं लेकर उन्हें अंग्रेजी विषय में पारंगत किया जा रहा है। श्री मण्डल बताते हैं कि कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन के .चलते पिछले 6 महीनो से शैक्षणिक गतिविधिया ठप्प चल रही है तो इन परिस्थितियों में वर्चुअल क्लास एवं मोहल्ला कक्षायें ही एक मात्र विकल्प रह गया है प्रारंभ में उन्होंने ग्राम चैपाल एवं हाट बाजार शेड में मोहल्ला क्लास लेने का प्रयास किया परंतु ग्रामों बढ़ते कोरोना संक्रमण की आशंका एवं छात्रों की अधिक संख्या को देखते हुए यह व्यवहारिक नही हो पाया तो अन्ततः उन्होने वर्चुअल कक्षाओं का संचालन उपयुक्त प्रतीत हुआ इस क्रम में माह जुलाई में उन्होने कक्षा 6वी से 8वी के छात्रों का सोशल मिडिया वाॅटसएप गु्रप बनाकर, ‘‘सिस्को वेवेक्स‘‘ लिंक के दवारा अंग्रजी विषय को पढ़ाना शुरू किया इस सोशल मिडिया ग्रुप में ग्राम लजोड़ा के अलावा ग्राम सिरपुर, जुगानी, जैतपुरी, सोड़मा, हाई स्कूल के छात्रों को भी कनेक्ट किया गया।

वे आगे बताते है कि इस वर्चुअल क्लास के संचालन में शुरूवात में कुछ दिक्कते भी आई जैसे कई छात्रों के एंड्रायड फोन उनके पालको पास थे जो दिन भर अपने काम काज के सिलसिले में घर से बाहर रहते थे ऐसे में वर्चुअल क्लासों का समय प्रबंधंन नही हो पा रहा था। ऐसे छात्रों के लिए उनके पालको से चर्चा करके शाम का समय निर्धारण कर कक्षायें ली गई। ‘सिस्को वेवेक्स‘ लिंक के बारे मेें उन्होंने बताया कि इस लिंक के माध्यम से छात्र विषय संबंधित जानकारी, प्रश्नोतरी, विषय के शंका समाधान भी कर सकते है।

अंगेजी ग्रामर का विडियों बनाकर ‘यूट्यूब‘ में किया अपलोड
अधिक से अधिक छात्रों को वर्चुअल क्लासों से जोड़ने के अपने प्रयासो में तेजी लाने के क्रम में शिक्षक अचिन्त्य मण्डल ने ‘यूट्यूब‘ के माध्यम से अपने विषय संबंधित विडियो को अपलोड करना शुरू कर दिया इसका कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि चूकिं कही कही शालाओं में विडियो अपलोड नही हो पा रहा था जबकी ‘यूट्यूब‘ में अपलोड करने में आसानी हो रही थी और विशेेष बात यह रही कि इन विडियों को जिला कवर्धा एवं राजनान्दगांव जिलों में उनके द्वारा पूर्व में पढ़ाये ंगये छात्रों ने भी देखा और उन्हें प्रोत्साहित किया इस प्रतिसाद के कारण उन्होंने इंगलिश ग्रामर के अलग अलग चैप्टर की व्याख्यात्मक जानकारी विडियों के माध्यम से अपलोड किया इस प्रकार इस विडियों शिक्षा के माध्यम से लगभग 150 स्थानीय छात्र जुड़े हुए है। श्री अचिन्त्य न केवल प्रश्नोतरी के माध्यम से अपने छात्रों से जुडे है बल्कि उनसे ‘फीडबेक‘ लेते हुए अंग्रेजी के कठिन अध्यायों के संबंध में मार्गदर्शन बराबर देते है।

यह बताना जरूरी होगा कि अचिन्त्य मण्डल को छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना महामारी के समय छात्रों की अनवरत पढ़ाई जारी रखने में स्वेच्छिक रूप से भागीदारी निभाने के लिए एवं नियमित आॅनलाइन कक्षाओं हेतु प्रशस्ति पत्र भी प्रदाय किया गया है इस संबंध में श्री मण्डल का मानना है कि कोरोना संकट काल में भले ही स्कूल काॅलेज बंद है परंतुु छात्रों तक शिक्षा की पहुँच होनी चाहिए चाहे वह मोहल्ला क्लास हो या फिर वर्चुअल कक्षा ऐसे में हर शिक्षक का यह गंभीर उत्तरदायित्व है कि वे अपने छात्रो के संपर्क में रह कर उनकी शिक्षा संबंधी हर जिज्ञासा का संमाधान तत्परता पूर्वक करे क्योंकि यह हर बच्चें के भविष्य का सवाल है और तो और शासन द्वारा भी इसमें निरंतर सहयोग किया जा रहा है छात्रों के संपर्क में रह कर ही हम शाला के शिक्षा वातावरण को बरकरार रख सकते है। कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि अचिन्त्य मण्डल जैसे शिक्षकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा देने की यह पहल सराहनीय होने के साथ साथ अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत है।

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bhupendra

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