Diwali 2020: दिवाली पर बन रहे दुलर्भ संयोग पर ऐसे करें मां लक्ष्‍मी की पूजा, देखते ही देखते हो जाएंगे मालामाल

Diwali 2020: दिवाली पर बन रहे दुलर्भ संयोग पर ऐसे करें मां लक्ष्‍मी की पूजा, देखते ही देखते हो जाएंगे मालामाल

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 दिवाली पर इस बार 499 साल बाद ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है जो आपको मालामाल कर सकता है। इस संयोग से आपके घर मां लक्ष्मी का वास होगा और समृद्धि आएगी। दिवाली में गुरु ग्रह अपनी राशि धनु में और शनि अपनी राशि मकर में रहेंगे। शुक्र ग्रह कन्या राशि में नीच रहेगा और इन तीनों ग्रहों का यह दुर्लभ योग वर्ष 2020 से पहले नौ नवंबर 1521 में देखने को मिला था। गुरु व शनि ग्रह अपनी राशि में आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले ग्रह माने गए हैं। ऐसे में यह दीपावली शुभ संकेत लेकर आई है।

जैसे नवरात्रि पर नौ दिन, दुर्गा माता के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है, ठीक उसी भांति दीवाली के अवसर पर पंचोत्सव मनाने की परंपरा है। किस दिन क्या पर्व होगा और उस दिन क्या छोटे छोटे कार्य व उपाय करने चाहिए, उसका दैनिक विवरण संक्षिप्त रुप में हम दे रहे हैं।

14 नवंबर को स्थिर लग्न वृषभ शाम 5:17 बजे से शाम 7:13 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:12 से शाम 7:52 तक रहेगा। अमावस्या की तिथि 14 नवंबर को दोपहर 2:12 बजे से 15 नवंबर को सुबह 10:36 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में पूजा करना श्रेयस्कर होगा।

दिवाली 2020 शुभ पूजन मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5 बजकर 28 मिनट से शाम 7 बजकर 24 मिनट तक।

प्रदोष काल मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 07 मिनट तक

वृषभ काल मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 7 बजकर 24 मिनट तक

चौघड़िया मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन-

दोपहर में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 14 नवंबर की दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से शाम को 04 बजकर 07 मिनट तक।

शाम में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त- 14 नवंबर की शाम को 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 07 मिनट तक।

रात में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त- 14 नवंबर की रात 08 बजकर 47 मिनट से देर रात 01 बजकर 45 मिनट तक।

प्रात:काल में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त- 15 नवंबर को 05 बजकर 04 मिनट से 06 बजकर 44 मिनट तक।

प्रदोष काल  सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त  लक्ष्मी पूजन का सबसे उत्तम समय स्थिर लग्न होने से पूजा का विशेष महत्व।

महानिशीथ काल  मध्य रात्रि के समय आने वाला मुहूर्त, माता काली के पूजन का विधान, तांत्रिक पूजा के लिए शुभ समय।

1.  देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए। क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं। मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाये तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है।

2.  महानिशीथ काल के दौरान भी पूजन का महत्व है लेकिन यह समय तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। इस काल में मां काली की पूजा का विधान है। इसके अलावा वे लोग भी इस समय में पूजन कर सकते हैं, जो महानिशिथ काल के बारे में समझ रखते हों।

विभिन्न पर्वों पर शुभ मुहूर्त

12 नवंबर  – गुरुवार- गोवत्स द्वादशी ,

13 नवंबर – शुक्रवार- धन त्रयोदशी- धनवंतरी जयंती, हनुमान जयंती

14 नवंबर – शनिवार – चर्तुदशी, नरक चौदश , दीवाली

14 नवंबर – शनिवार – दीवाली

15 नवंबर – रविवार, गोवर्धन पूजा , अन्नकूट , विश्वकर्मा दिवस

16 नवंबर -सोमवार- यम द्वितीया- भाई दूज

bhupendra

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