आखिर खरसिया विधानसभा को आदिवासियों के लिए आरक्षित करने क्यों उठने लगी मांग…* *सोसल मीडिया में एक जनप्रतिनिधि के पोस्ट ने राजनीति में ला दिया है भूचाल..

*क्या खरसिया विधानसभा सीट होगा आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित…❓❓* *आखिर खरसिया विधानसभा को आदिवासियों के लिए आरक्षित करने क्यों उठने लगी मांग…❓* *सोसल मीडिया में एक जनप्रतिनिधि के पोस्ट ने राजनीति में ला दिया है भूचाल..‼️*

*खरसिया/छत्तीसगढ़* ………………….खरसिया विधानसभा क्षेत्र में लगभग 70% से अधिक ग्राम पंचायत आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित है खरसिया विधानसभा में खरसिया ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायत आदिवासियों के लिये भी आरक्षित है किंतु खरसिया विधानसभा सीट न जाने किस राजनीतिक षड्यंत्र कहें या फिर तकनीकि खामी के कारण खरसिया विधानसभा सीट आदिवासियों के सर्वाधिक प्रतिशत व्होट होने के बावजूद हमेशा से सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहा है। पूर्व में कांग्रेस से 5 बार लक्ष्मी पटेल विधायक रह चुके हैं। वहीं 1988 में लक्ष्मी पटेल ने अपने राजनीतिक गुरु पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ दिया था जहां से उपचुनाव में मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का मुकाबला हिन्दू विजय सम्राट दिलीप सिंह जूदेव से हुआ था जिसमे बहुत ही संघर्ष पूर्ण मुकाबले में अर्जुन सिंह ने विजय श्री हासिल किया था। बीजेपी के पितृ पुरुष लखीराम अग्रवाल भी खरसिया से अपना भाग्य आजमा चुकें हैं जहां उनका मुकाबला खरसिया के एक सरपंच नंदकुमार पटेल से हुआ था जो कि नन्देली ग्राम के थे जहां उन्होंने लखीराम अग्रवाल को शिकस्त दिया था तब से लगातार 5 बार नंदकुमार पटेल खरसिया विधानसभा से अजेय योद्धा रहे मध्यप्रदेश के गृहमंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ के भी गृह मंत्री रहे बाद में छत्तीसगढ़ पीसीसी कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे जिनको बीजेपी हरा तो नही सकी लेकिन नक्सली हमले में 2013 में स्व.नंदकुमार पटेल के हत्या के बाद से खरसिया सहित छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक रिक्तता आ गया था। बीजेपी के दिग्गज नेता गिरधर गुप्ता को भी खरसिया सीट से हार का सामना करना पड़ा था।
स्व.नंदकुमार के निधन के बाद जरूर बीजेपी को खरसिया विधानसभा में बीजेपी का कमल खिलाने की उम्मीद जगी थी लेकिन झीरम घाटी कांड में कांग्रेस नेताओं के जनसंहार का आरोप झेल रहे छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री डॉ रमन सिंह ने खरसिया विधानसभा को वाक ओव्हर देते हुए बीजेपी के जिला अध्यक्ष रहे डॉ जवाहर नायक को खरसिया विधानसभा सीट से बलि का बकरा बना दिया था। अंततः शहादत की लहर एवं सहानुभूति लहर के कारण स्व.नंदकुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल को लगभग 42 हजार मतों से जीत मिला था। क्योंकि बीजेपी के नेताओ ने हथियार डाल के पूर्व की तरह ही 2014 के चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाने महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था।
2019 के चुनाव में कांग्रेस के विधायक उमेश को हराने के लिए बीजेपी ने रायपुर कलेक्टर ओ पी चौधरी को स्थिफ़ा दिलाकर चुनाव मैदान में उतारा था हालांकि यह चुनाव अत्याधिक संघर्ष पूर्ण रहा किंतु फिर भी अंततः बीजेपी नेताओं के कांग्रेस पार्टी के सांथ अंदरूनी साँठगाँठ के कारण ओ पी चौधरी को 17 हजार व्होटों से हार का सामना करना पड़ा था । कुल मिलाकर लगातार आजादी के बाद से खरसिया विधानसभा स्थापना के बाद से लगातार कांग्रेस खरसिया विधानसभा सीट में काबिज रही है। किंतु बीजेपी का कमल खरसिया में कभी नही खिल सका न ही आगे खिलने की कोई उम्मिद नजर आती है। जैसा वर्तमान बीजेपी नेताओं का कार्यकर्ताओं को यूज एंड थ्रो परम्परा के कारण वर्तमान में खरसिया विधानसभा में बीजेपी की हालत कुछ खास ठीक नही है।
खरसिया विधानसभा में कांग्रेस के पूर्व में दिग्गज नेता रह चुके पूर्व जनपद सदस्य राजकुमार सिदार के द्वारा खरसिया क्षेत्र में लगातार भूमाफियाओं एवं राजनीतिक दलों द्वारा आदिवासी समुदाय के साथ किये जा रहे आर्थिक एवं मानसिक शोषण कप ध्यान में रखते हुए खरसिया विधानसभा सीट को आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित किये जाने के लिए फेसबुक में जो पोस्ट किया है इसकी चिंगारी न सिर्फ खरसिया विधानसभा तक सीमित है बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। यदि खरसिया विधानसभा के आदिवासी समुदाय को उक्त अपील समझ आ जाता है तो खरसिया विधानसभा से लगातार 7 वीं बार विधानसभा की कुर्सी में काबिज पटेल परिवार की कुर्सी भो खतरे में पड़ सकती है……….फिलहाल राजकुमार सिदार के पोस्ट ने पूरे प्रदेश में तहलका मचा दिया है……क्रमश..

bhupendra

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